Thursday, August 27, 2020
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101 साल: ‘जलियाँवाला बाग ये देखो यहीं चली थी गोलियां, ये मत पूछो किसने खेली यहां खून की होलियां’

अमृतसर। 101 वर्ष पहले आज ही के दिन जलियांवाला बाग नरसंहार (Jallianwala Bagh Massacre) हुआ था और कवि प्रदीप के गीत ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिन्दुस्तान की’ के एक अंतरे में जलियांवाला बाग ये देखो, यहीं चली थी गोलियां सुनने के बाद ऐसा लगता है मानो वो खौफनाक मंजर एक बार फिर से आंखों के सामने आ गया हो। आज का ये दिन देश की आजादी के इतिहास में एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। जब इस बाग में क्रूर ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर के एक इशारे पर हजारों मजबूर लोगों को मौत की नींद में सुला दिया गया था।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को इस घटना ने बिल्कुल अलग रुख दे दिया था। घटना इतनी अमानवीय थी कि ब्रिटिश संसद में भी जनरल डायर की आलोचना हुई थी। उस वक्त ब्रिटेन के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर वॉर रहे विंस्टन चर्चिल ने खुले रूप से इस घटना की आलोचना की थी। पंजाब के अमृतसर जिले में ऐतिहासिक स्वर्ण मंदिर के नजदीक जलियांवाला बाग नाम के इस बगीचे में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए जमा हुए हजारों भारतीयों पर अंग्रेज हुक्मरान ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। अंग्रेजों की गोलीबारी से घबराई बहुत सी औरतें अपने बच्चों को लेकर जान बचाने के लिए कुएं में कूद गईं।

निकास का रास्ता संकरा होने के कारण बहुत से लोग भगदड़ में कुचले गए और हजारों लोग गोलियों की चपेट में आए थे। इस नरसंहार में ब्रिटिश सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक 379 लोग मारे गए थे जबकि 1200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद पंजाब में मार्शल लॉ लगा दिया गया। जब पंजाब में हुए हत्याकांड और उसके बाद लोगों पर ब्रिटिश सरकार के अत्याचार की खबर देश में फैली तो ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया। इस चीज ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी। गांधीजी शुरू में किसी बड़े आंदोलन से हिचकिचा रहे थे लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा।

साल 1919 की घटना की याद में अब यहां पर स्मारक बना हुआ है, जिसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं। बता दें कि यहां की दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। इस स्मारक में लौ के रूप में एक मीनार बनाई गई है जहां शहीदों के नाम अंकित हैं। मौत और ब्रिटिश राज के आतंक का मंजर देखने वाला वो कुआं भी इस परिसर में मौजूद हैं जिसमें उस दिन गोलीबारी से बचने के लिए लोग कूद गए थे।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को इस घटना ने बिल्कुल अलग रुख दे दिया था। घटना इतनी अमानवीय थी कि ब्रिटिश संसद में भी जनरल डायर की आलोचना हुई थी।

shiwam pandey
My name is Shiwam Pandey and I am a late bloomer but an early learner. I likes to be honestly biased. Though fascinated by the far-flung corners of the galaxy, I doesn’t fancy the idea of humans moving to Mars. I am a Contributing Author for Daynewspaper.com. Be it mobile devices, laptops, etc. I brings my passion for technology wherever i goes.

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